Ram Awtar Gupta Muztar's Photo'

राम अवतार गुप्ता मुज़्तर

1936 | नजीबाबाद, भारत

राम अवतार गुप्ता मुज़्तर

ग़ज़ल 15

अशआर 15

दिल का सुकून रिज़्क़ के हंगामे खा गए

सुख आदमी का चंद निवालों ने डस लिया

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शाम-ए-अवध ने ज़ुल्फ़ में गूँधे नहीं हैं फूल

तेरे बग़ैर सुब्ह-ए-बनारस उदास है

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नवाज़ा है मुझे पत्थर से जिस ने

उसे मैं फूल दे कर देखता हूँ

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देख लिया क्या जाने शाम की सूनी आँखों में

झील में सूरज अपनी सारी लाली डाल गया

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लम्हा लम्हा बिखर रहा हूँ मैं

अपनी तकमील कर रहा हूँ मैं

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Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI