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ज़ुबैर रिज़वी

1935 - 2016 | दिल्ली, भारत

प्रमुखतम आधुनिक शायरों में विख्यात/अपनी साहित्यिक पत्रिका ‘ज़ह्न-ए-जदीद’ के लिए प्रसिद्ध

प्रमुखतम आधुनिक शायरों में विख्यात/अपनी साहित्यिक पत्रिका ‘ज़ह्न-ए-जदीद’ के लिए प्रसिद्ध

ग़ज़ल 40

नज़्म 38

शेर 32

दूर तक कोई आया उन रुतों को छोड़ने

बादलों को जो धनक की चूड़ियाँ पहना गईं

वो जिस को देखने इक भीड़ उमडी थी सर-ए-मक़्तल

उसी की दीद को हम भी सुतून-ए-दार तक आए

सुख़न के कुछ तो गुहर मैं भी नज़्र करता चलूँ

अजब नहीं कि करें याद माह साल मुझे

ई-पुस्तक 20

Asari Hindustani Thetar

 

2012

अाज़ादी के बाद उर्दू स्टेज़ ड्रामे

 

2008

Daaman

 

1984

Daman

 

1984

गर्दिश-ए-पा

खण्ड-001

2000

Ghalib Aur Funoon-e-Lateefa

 

2004

Khisht-e-Deewar

 

1970

Lahar Lahar Nadiya Gahri

 

1964

मसाफ़त-ए-शब

 

1977

Mataa-e-Sukhan

Zubair Rizvi Ke Adbi Safar Ka Zaieza

2009

चित्र शायरी 2

कहाँ मैं जाऊँ ग़म-ए-इश्क़-ए-राएगाँ ले कर ये अपने रंज ये अपनी उदासियाँ ले कर जला है दिल या कोई घर ये देखना लोगो हवाएँ फिरती हैं चारों तरफ़ धुआँ ले कर बस इक हमारा लहू सर्फ़-ए-क़त्ल-गाह हुआ खड़े हुए थे बहुत अपने जिस्म ओ जाँ ले कर नए घरों में न रौज़न थे और न मेहराबें परिंदे लौट गए अपने आशियाँ ले कर समुंदरों के सफ़र जिन के नाम लिक्खे थे उतर गए वो किनारों पे कश्तियाँ ले कर तलाश करते हैं नौ-साख़्ता मकानों में हम अपने घर को पुरानी निशानियाँ ले कर उन्हें भी सहने पड़े थे अज़ाब मौसम के चले थे अपने सरों पर जो साएबाँ ले कर हवा में हिलते हुए हाथ पूछते हैं 'ज़ुबैर' तुम अब गए तो कब आओगे छुट्टियाँ ले कर

 

वीडियो 26

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
At a mushaira

ज़ुबैर रिज़वी

At a mushaira

ज़ुबैर रिज़वी

Bache aur Badbu_Nazm by Zubair Rizvi

One of the most prominent modern poets. Well-known broadcaster associated with All India Radio. Famous for his literary magazine Zahn-e-Jadeed. ज़ुबैर रिज़वी

Hind-o-Pak Dosti Aalmi Mushaira Houston 2005

ज़ुबैर रिज़वी

Hum kaha agaye_Nazm by Zubair Rizvi

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Maine kab bark e tapa mauj e bala maangi_Ghazal by Zubair Rizvi

One of the most prominent modern poets. Well-known broadcaster associated with All India Radio. Famous for his literary magazine Zahn-e-Jadeed. ज़ुबैर रिज़वी

Suno kal tumhe humne madras cafe mein aabosh logon ke humraah dekha_Nazm by Zubair Rizvi

One of the most prominent modern poets. Well-known broadcaster associated with All India Radio. Famous for his literary magazine Zahn-e-Jadeed. ज़ुबैर रिज़वी

Tum kuch soch mein doob gai ho_Nazm by Zubair Rizvi

One of the most prominent modern poets. Well-known broadcaster associated with All India Radio. Famous for his literary magazine Zahn-e-Jadeed. ज़ुबैर रिज़वी

Zindagi aise gharo se khandar ache the_Ghazal by Zubair Rizvi

One of the most prominent modern poets. Well-known broadcaster associated with All India Radio. Famous for his literary magazine Zahn-e-Jadeed. ज़ुबैर रिज़वी

Zubair Rizvi ricitng his ghazal/nazm at sham e sher mushaira by Rekhta.org

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तब्दीली

One of the most prominent modern poets. Well-known broadcaster associated with All India Radio. Famous for his literary magazine Zahn-e-Jadeed. ज़ुबैर रिज़वी

अकेले होने का ख़ौफ़

हमें ये रंज था ज़ुबैर रिज़वी

अली-बिन-मुत्तक़ी रोया

पुरानी बात है ज़ुबैर रिज़वी

कई कोठे चढ़ेगा वो कई ज़ीनों से उतरेगा

ज़ुबैर रिज़वी

ग़ुरूब-ए-शाम ही से ख़ुद को यूँ महसूस करता हूँ

ज़ुबैर रिज़वी

ज़िंदगी ऐसे घरों से तो खंडर अच्छे थे

ज़ुबैर रिज़वी

दिल के तातार में यादों के अब आहू भी नहीं

ज़ुबैर रिज़वी

बच्चे और बदबू

बच्चों उस्तादों और सर-परस्तों ने ज़ुबैर रिज़वी

बिछड़ते दामनों में फूल की कुछ पत्तियाँ रख दो

ज़ुबैर रिज़वी

मैं ने कब बर्क़-ए-तपाँ मौज-ए-बला माँगी थी

ज़ुबैर रिज़वी

रद्द-ए-अमल

मुझे ये यक़ीं था ज़ुबैर रिज़वी

शफ़क़-सिफ़ात जो पैकर दिखाई देता है

ज़ुबैर रिज़वी

सियाह पट्टी

हम अभी कुछ देर पहले साथ थे ज़ुबैर रिज़वी

है धूप कभी साया शोला है कभी शबनम

ज़ुबैर रिज़वी

हम कहाँ आ गए

हम कहाँ आ गए ज़ुबैर रिज़वी

हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे

ज़ुबैर रिज़वी

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