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असग़र गोंडवी

1884 - 1936 | गोण्डा, भारत

प्रख्यात पूर्व-आधुनिक शायर, अपने सूफ़ियाना लहजे के लिए प्रसिद्ध।

प्रख्यात पूर्व-आधुनिक शायर, अपने सूफ़ियाना लहजे के लिए प्रसिद्ध।

ग़ज़ल 38

शेर 53

चला जाता हूँ हँसता खेलता मौज-ए-हवादिस से

अगर आसानियाँ हों ज़िंदगी दुश्वार हो जाए

I go laughing playing with waves of adversity

If life were to be easy, unbearable it would be

अक्स किस चीज़ का आईना-ए-हैरत में नहीं

तेरी सूरत में है क्या जो मेरी सूरत में नहीं

ज़ाहिद ने मिरा हासिल-ए-ईमाँ नहीं देखा

रुख़ पर तिरी ज़ुल्फ़ों को परेशाँ नहीं देखा

the priest has seen my piety, he hasn't seen your grace

he has not seen your tresses strewn across your face

पुस्तकें 43

असग़र

 

1945

असग़र गोण्डवी शख़्सियत और फ़न

 

1994

Asghar Gondwi ki Shayari

Part-001

 

दीवान-ए-असग़र

 

 

Hindustani

 

1935

Intikhab-e-Asghar

Halat Aur Kalam Par Tanqeed

1954

Intikhab-e-Kalam Asghar Gondvi

 

1962

Kalam-e-Asghar

 

1962

कुल्लियात-ए-असग़र

 

2004

Kulliyat-e-Asghar

 

 

वीडियो 4

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ऑडियो 21

आलाम-ए-रोज़गार को आसाँ बना दिया

आशोब-ए-हुस्न की भी कोई दास्ताँ रहे

इक आलम-ए-हैरत है फ़ना है न बक़ा है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI