Riyaz Khairabadi's Photo'

रियाज़ ख़ैराबादी

1853 - 1934 | ख़ैराबाद, भारत

शराब पर शायरी के लिए प्रसिध्द , जब कि कहा जाता है कि उन्हों ने शराब को कभी हाथ नहीं लगाया।

शराब पर शायरी के लिए प्रसिध्द , जब कि कहा जाता है कि उन्हों ने शराब को कभी हाथ नहीं लगाया।

ग़ज़ल 128

शेर 111

दिल-जलों से दिल-लगी अच्छी नहीं

रोने वालों से हँसी अच्छी नहीं

अच्छी पी ली ख़राब पी ली

जैसी पाई शराब पी ली

मय-ख़ाने में क्यूँ याद-ए-ख़ुदा होती है अक्सर

मस्जिद में तो ज़िक्र-ए-मय-ओ-मीना नहीं होता

  • शेयर कीजिए

पुस्तकें 10

Intikhab Kulliyat-e-Riyaz Khairabadi

 

1982

Intikhab-e-Fitna

 

 

इंतिख़ाब-ए-रियाज़ ख़ैराबादी

 

1959

Intikhab-e-Riyaz Khairabadi

 

1983

कलाम-ए-रियाज़ ख़ैराआबादी

 

1960

Maikhana-e-Riyaz

 

1945

क़ुल्क़ुल-ए-मीना

 

1998

Riyaz Khairabadi

 

1964

रियाज़ ख़ैराबादी

हयात और अदबी ख़िदमात

1974

Riyaz-e-Rizwan

 

1961

 

चित्र शायरी 2

मेहंदी लगाए बैठे हैं कुछ इस अदा से वो मुट्ठी में उन की दे दे कोई दिल निकाल के

ऐसी ही इंतिज़ार में लज़्ज़त अगर न हो तो दो घड़ी फ़िराक़ में अपनी बसर न हो

 

ऑडियो 3

कोई मुँह चूम लेगा इस नहीं पर

बाम पर आए कितनी शान से आज

कुछ भी हो 'रियाज़' आँख में आँसू नहीं आते

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

 

संबंधित शायर

  • दिल शाहजहाँपुरी दिल शाहजहाँपुरी समकालीन
  • साक़िब लखनवी साक़िब लखनवी समकालीन
  • वसीम ख़ैराबादी वसीम ख़ैराबादी समकालीन
  • अमीर मीनाई अमीर मीनाई गुरु

"ख़ैराबाद" के और शायर

  • जुंबिश ख़ैराबादी जुंबिश ख़ैराबादी
  • हिरमाँ ख़ैराबादी हिरमाँ ख़ैराबादी
  • सय्यद मुबीन अल्वी ख़ैराबादी सय्यद मुबीन अल्वी ख़ैराबादी
  • मायल  ख़ैराबादी मायल ख़ैराबादी
  • ऐवान-ए-उर्दू, ख़ैराबाद ऐवान-ए-उर्दू, ख़ैराबाद