संपूर्ण
परिचय
ग़ज़ल199
नज़्म25
शेर101
ई-पुस्तक579
चित्र शायरी 21
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क़ितआ1
ब्लॉग2
सलाम2
फ़रहत एहसास
ग़ज़ल 199
नज़्म 25
अशआर 101
इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से
मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँ नहीं करते
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क़ितआ 1
सलाम 2
पुस्तकें 579
चित्र शायरी 21
जो इश्क़ चाहता है वो होना नहीं है आज ख़ुद को बहाल करना है खोना नहीं है आज आँखों ने देखते ही उसे ग़ुल मचा दिया तय तो यही हुआ था कि रोना नहीं है आज ये रात अहल-ए-हिज्र के ख़्वाबों की रात है क़िस्सा तमाम करना है सोना नहीं है आज जो अपने घर में है वो है बाज़ार में नहीं होना किसी का शहर में होना नहीं है आज फिर तिफ़्ल-ए-दिल है दौलत-ए-दुनिया पे गिर्या-बार और मेरे पास कोई खिलौना नहीं है आज
अब दिल की तरफ़ दर्द की यलग़ार बहुत है दुनिया मिरे ज़ख़्मों की तलबगार बहुत है अब टूट रहा है मिरी हस्ती का तसव्वुर इस वक़्त मुझे तुझ से सरोकार बहुत है मिट्टी की ये दीवार कहीं टूट न जाए रोको कि मिरे ख़ून की रफ़्तार बहुत है हर साँस उखड़ जाने की कोशिश में परेशाँ सीने में कोई है जो गिरफ़्तार बहुत है पानी से उलझते हुए इंसान का ये शोर उस पार भी होगा मगर इस पार बहुत है