ईद मुबारक

ईद के उत्‍साह और उमंग पर चुनिंदा शायरी का उपहार


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आई ईद दिल में नहीं कुछ हवा-ए-ईद


काश मेरे पास तू आता बजाए ईद

आज यारों को मुबारक हो कि सुब्ह-ए-ईद है


राग है मय है चमन है दिलरुबा है दीद है

आप इधर आए उधर दीन और ईमान गए


ईद का चाँद नज़र आया तो रमज़ान गए

बादबाँ नाज़ से लहरा के चली बाद-ए-मुराद


कारवाँ ईद मना क़ाफ़िला-सालार आया

ग़म के पीछो रास्त कहते हैं कि शादी होवे है


हज़रत-ए-रमज़ां गए तशरीफ़ ले अब ईद है

है ईद का दिन आज तो लग जाओ गले से


जाते हो कहाँ जान मिरी के मुक़ाबिल

ईद अब के भी गई यूँही किसी ने कहा


कि तिरे यार को हम तुझ से मिला देते हैं

ईद है क़त्ल मिरा अहल-ए-तमाशा के लिए


सब गले मिलने लगे जब कि वो जल्लाद आया

ईद का दिन है गले आज तो मिल ले ज़ालिम


रस्म-ए-दुनिया भी है मौक़ा भी है दस्तूर भी है

ईद को भी वो नहीं मिलते हैं मुझ से मिलें


इक बरस दिन की मुलाक़ात है ये भी सही

ईद तू के मिरे जी को जलावे अफ़्सोस


जिस के आने की ख़ुशी हो वो आवे अफ़्सोस

जनाब के रुख़-ए-रौशन की दीद हो जाती


तो हम सियाह-नसीबों की ईद हो जाती

कई फ़ाक़ों में ईद आई है


आज तू हो तो जान हम-आग़ोश

कहीं है ईद की शादी कहीं मातम है मक़्तल में


कोई क़ातिल से मिलता है कोई बिस्मिल से मिलता है

कहते हैं ईद है आज अपनी भी ईद होती


हम को अगर मयस्सर जानाँ की दीद होती

महक उठी है फ़ज़ा पैरहन की ख़ुशबू से


चमन दिलों का खिलाने को ईद आई है

मेरे सुर्ख़ लहू से चमकी कितने हाथों में मेहंदी


शहर में जिस दिन क़त्ल हुआ मैं ईद मनाई लोगों ने

मेरी ख़ुशियों से वो रिश्ता है तुम्हारा अब तक


ईद हो जाए अगर ईद-मुबारक कह दो

मिलेगा ग़ैर भी उन के गले ब-शौक़ दिल


हलाल करने मुझे ईद का हिलाल आया

क़त्ल की सुन के ख़बर ईद मनाई मैं ने


आज जिस से मुझे मिलना था गले मिल आया

तुझ को मेरी मुझे तेरी ख़बर जाएगी


ईद अब के भी दबे पाँव गुज़र जाएगी

उस से मिलना तो उसे ईद-मुबारक कहना


ये भी कहना कि मिरी ईद मुबारक कर दे

वादों ही पे हर रोज़ मिरी जान टालो


है ईद का दिन अब तो गले हम को लगा लो

वही दिन है हमारी ईद का दिन


जो तिरी याद में गुज़रता है

वो सुब्ह-ए-ईद का मंज़र तिरे तसव्वुर में


वो दिल में के अदा तेरे मुस्कुराने की

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