Jameel Mazhari's Photo'

जमील मज़हरी

1904 - 1979 | कोलकाता, भारत

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायर, अपने अपारम्परिक विचारों के लिए विख्यात

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायर, अपने अपारम्परिक विचारों के लिए विख्यात

जमील मज़हरी

ग़ज़ल 39

नज़्म 7

अशआर 11

जलाने वाले जलाते ही हैं चराग़ आख़िर

ये क्या कहा कि हवा तेज़ है ज़माने की

हम मोहब्बत का सबक़ भूल गए

तेरी आँखों ने पढ़ाया क्या है

  • शेयर कीजिए

होने दो चराग़ाँ महलों में क्या हम को अगर दीवाली है

मज़दूर हैं हम मज़दूर हैं हम मज़दूर की दुनिया काली है

  • शेयर कीजिए

ब-क़द्र-ए-पैमाना-ए-तख़य्युल सुरूर हर दिल में है ख़ुदी का

अगर हो ये फ़रेब-ए-पैहम तो दम निकल जाए आदमी का

इन्ही हैरत-ज़दा आँखों से देखे हैं वो आँसू भी

जो अक्सर धूप में मेहनत की पेशानी से ढलते हैं

मर्सिया 1

 

पुस्तकें 23

ऑडियो 11

उलझी थी ज़ुल्फ़ उस ने सँवारा सँवर गई

कब तक निबाहें ऐसे ग़लत आदमी से हम

कहो न ये कि मोहब्बत है तीरगी से मुझे

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

संबंधित शायर

"कोलकाता" के और शायर

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

बोलिए