इंतिज़ार शायरी

इंतिज़ार ख़ास अर्थों में दर्दनाक होता है । इसलिए इस को तकलीफ़-देह कैफ़ियत का नाम दिया गया है । जीवन के आम तजरबात से अलग इंतिज़ार उर्दू शाइरी के आशिक़ का मुक़द्दर है । आशिक़ जहाँ अपने महबूब के इंतिज़ार में दोहरा हुआ जाता है वहीं उस का महबूब संग-दिल ज़ालिम, ख़ुद-ग़रज़, बे-वफ़ा, वादा-ख़िलाफ़ और धोके-बाज़ होता है । इश्क़ और प्रेम के इस तय-शुदा परिदृश्य ने उर्दू शाइरी में नए-नए रूपकों का इज़ाफ़ा किया है और इंतिज़ार के दुख को अनन्त-दुख में ढाल दिया है । यहाँ प्रस्तुत संकलन को पढ़िए और इंतिज़ार की अलग-अलग कैफ़ियतों को महसूस कीजिए ।

माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं

तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख

agreed I am not worthy of your vision divine

behold my zeal, my passion see how I wait and pine

अल्लामा इक़बाल

ये थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता

अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता

मिर्ज़ा ग़ालिब

इक रात वो गया था जहाँ बात रोक के

अब तक रुका हुआ हूँ वहीं रात रोक के

फ़रहत एहसास

गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले

चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

कोई वा'दा कोई यक़ीं कोई उमीद

मगर हमें तो तिरा इंतिज़ार करना था

no promise,surety, nor any hope was due

yet I had little choice but to wait for you

फ़िराक़ गोरखपुरी

वो रहे हैं वो आते हैं रहे होंगे

शब-ए-फ़िराक़ ये कह कर गुज़ार दी हम ने

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जिस की आँखों में कटी थीं सदियाँ

उस ने सदियों की जुदाई दी है

गुलज़ार

कब ठहरेगा दर्द दिल कब रात बसर होगी

सुनते थे वो आएँगे सुनते थे सहर होगी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जान-लेवा थीं ख़्वाहिशें वर्ना

वस्ल से इंतिज़ार अच्छा था

जौन एलिया

जानता है कि वो आएँगे

फिर भी मसरूफ़-ए-इंतिज़ार है दिल

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तेरे आने की क्या उमीद मगर

कैसे कह दूँ कि इंतिज़ार नहीं

फ़िराक़ गोरखपुरी

ये कैसा नश्शा है मैं किस अजब ख़ुमार में हूँ

तू के जा भी चुका है मैं इंतिज़ार में हूँ

मुनीर नियाज़ी

इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैं

आने वाले बरसों ब'अद भी आते हैं

ज़ेहरा निगाह

आप का ए'तिबार कौन करे

रोज़ का इंतिज़ार कौन करे

who can depend on what you say?

who will wait each every day?

दाग़ देहलवी

कौन आएगा यहाँ कोई आया होगा

मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा

कैफ़ भोपाली

मुझ को ये आरज़ू वो उठाएँ नक़ाब ख़ुद

उन को ये इंतिज़ार तक़ाज़ा करे कोई

I had hoped she would unveil at her own behest

and she waits for someone to make a request

असरार-उल-हक़ मजाज़

वो आएगा हमें मालूम था इस शाम भी

इंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे

परवीन शाकिर

ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया

तमाम रात क़यामत का इंतिज़ार किया

दाग़ देहलवी

सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी

तुम आए तो इस रात की औक़ात बनेगी

जाँ निसार अख़्तर

हमें भी आज ही करना था इंतिज़ार उस का

उसे भी आज ही सब वादे भूल जाने थे

आशुफ़्ता चंगेज़ी

कहीं वो के मिटा दें इंतिज़ार का लुत्फ़

कहीं क़ुबूल हो जाए इल्तिजा मेरी

let her not come to me and this pleasure destroy

let not my prayers be answered, for waiting is a joy

हसरत जयपुरी

कोई इशारा दिलासा कोई व'अदा मगर

जब आई शाम तिरा इंतिज़ार करने लगे

वसीम बरेलवी

अब इन हुदूद में लाया है इंतिज़ार मुझे

वो भी जाएँ तो आए ऐतबार मुझे

ख़ुमार बाराबंकवी

मुझे ख़बर थी मिरा इंतिज़ार घर में रहा

ये हादसा था कि मैं उम्र भर सफ़र में रहा

साक़ी फ़ारुक़ी

वो चाँद कह के गया था कि आज निकलेगा

तो इंतिज़ार में बैठा हुआ हूँ शाम से मैं

फ़रहत एहसास

मैं लौटने के इरादे से जा रहा हूँ मगर

सफ़र सफ़र है मिरा इंतिज़ार मत करना

intent on returning

a journey is a journey so do not wait for me

साहिल सहरी नैनीताली

ये इंतिज़ार नहीं शम्अ है रिफ़ाक़त की

इस इंतिज़ार से तन्हाई ख़ूब-सूरत है

अरशद अब्दुल हमीद

इक उम्र कट गई है तिरे इंतिज़ार में

ऐसे भी हैं कि कट सकी जिन से एक रात

फ़िराक़ गोरखपुरी

बे-ख़ुदी ले गई कहाँ हम को

देर से इंतिज़ार है अपना

मीर तक़ी मीर

बाग़-ए-बहिश्त से मुझे हुक्म-ए-सफ़र दिया था क्यूँ

कार-ए-जहाँ दराज़ है अब मिरा इंतिज़ार कर

Why did you bid me leave from paradise for now

My work is yet unfinished here so you wil have to wait

अल्लामा इक़बाल

है ख़ुशी इंतिज़ार की हर दम

मैं ये क्यूँ पूछूँ कब मिलेंगे आप

निज़ाम रामपुरी

ये दाग़ दाग़ उजाला ये शब-गज़ीदा सहर

वो इंतिज़ार था जिस का ये वो सहर तो नहीं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

शब-ए-इंतिज़ार की कश्मकश में पूछ कैसे सहर हुई

कभी इक चराग़ जला दिया कभी इक चराग़ बुझा दिया

मजरूह सुल्तानपुरी

दरवाज़ा खुला है कि कोई लौट जाए

और उस के लिए जो कभी आया गया हो

अतहर नफ़ीस

मैं ने समझा था कि लौट आते हैं जाने वाले

तू ने जा कर तो जुदाई मिरी क़िस्मत कर दी

अहमद नदीम क़ासमी

आधी से ज़ियादा शब-ए-ग़म काट चुका हूँ

अब भी अगर जाओ तो ये रात बड़ी है

साक़िब लखनवी

अब कौन मुंतज़िर है हमारे लिए वहाँ

शाम गई है लौट के घर जाएँ हम तो क्या

मुनीर नियाज़ी

कोई आया आएगा लेकिन

क्या करें गर इंतिज़ार करें

she came not, nor is likely to

save waiting what else can I do

फ़िराक़ गोरखपुरी

तमाम जिस्म को आँखें बना के राह तको

तमाम खेल मोहब्बत में इंतिज़ार का है

मुनव्वर राना

आने में सदा देर लगाते ही रहे तुम

जाते रहे हम जान से आते ही रहे तुम

Delay in arriving always managed to contrive

this world I was leaving, yet you didn't arrive

इमाम बख़्श नासिख़

मुद्दत से ख़्वाब में भी नहीं नींद का ख़याल

हैरत में हूँ ये किस का मुझे इंतिज़ार है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

बारहा तेरा इंतिज़ार किया

अपने ख़्वाबों में इक दुल्हन की तरह

परवीन शाकिर

कमाल-ए-इश्क़ तो देखो वो गए लेकिन

वही है शौक़ वही इंतिज़ार बाक़ी है

जलील मानिकपूरी

उन के आने के बाद भी 'जालिब'

देर तक उन का इंतिज़ार रहा

हबीब जालिब

जिसे आने की क़स्में मैं दे के आया हूँ

उसी के क़दमों की आहट का इंतिज़ार भी है

जावेद नसीमी

फिर बैठे बैठे वादा-ए-वस्ल उस ने कर लिया

फिर उठ खड़ा हुआ वही रोग इंतिज़ार का

अमीर मीनाई

अल्लाह रे बे-ख़ुदी कि तिरे पास बैठ कर

तेरा ही इंतिज़ार किया है कभी कभी

o lord! There are times when such is my raptured state

even though I am with you, and yet for you I wait

नरेश कुमार शाद

अब ख़ाक उड़ रही है यहाँ इंतिज़ार की

दिल ये बाम-ओ-दर किसी जान-ए-जहाँ के थे

जौन एलिया

तमाम उम्र तिरा इंतिज़ार हम ने किया

इस इंतिज़ार में किस किस से प्यार हम ने किया

हफ़ीज़ होशियारपुरी

जाने वाले कि तिरे इंतिज़ार में

रस्ते को घर बनाए ज़माने गुज़र गए

ख़ुमार बाराबंकवी